नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति का उपयोग किया जाता है, आज भी अंकशास्त्री नामांक की गणना इन्हीं प्राचीन तरीकों से करते आ रहे हैं। नामांक जीवन में आवश्यक बदलाव ला सकते हैं और हमारे जीवन को आशावादी दिशा प्रदान कर सकते है।
अकं ज्योतिष एक महत्वपूर्ण विद्या है, जिसके माध्यम से व्यक्ति के विषय एवं उसके भविष्य को जानने का प्रयास किया जाता है। नामांक ज्योतिष में अंकों के माध्यम द्वारा गणित के नियमों का व्यवहारिक उपयोग करके मनुष्य के विभिन्न पक्षों, उसकी विचारधारा , जीवन के विषय इत्यादि का विस्तार पूर्वक विवरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है।
जीवन में नाम का बहुत महत्व होता है नाम से ही हमारी पहचान होती है। नाम का महत्व खुद ब खुद दृष्टिगत होता है, तथा नाम रखने की विधि को संस्कार कर्म में रखा जाता है और इसमें जातक के जन्म नक्षत्र पर आधारित नाम रखने का प्रयास किया जाता है। कुछ स्थानों पर हम यह भी देखते हैं कि किसी व्यक्ति का नाम तो उचित होता है। लेकिन फिर भी सफलता पाने में उसे बहुत संघर्ष करना पड़ता या उसे वह सफलता मिल ही नहीं पाती, ऐसे समय में अंक ज्योतिष या अंक शास्त्र द्वारा हम नाम में कुछ परिवर्तन करके उस नाम का महत्व एवं प्रभाव और भी अधिक बढ़ा सकते हैं।
नामांक जीवन में बदलाव ला सकता हैं और हमारे जीवन को आशावादी दिशा प्रदान कर सकता है। नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है। नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है आज भी लगभग सभी अंक-शास्त्री नामांक की गणना इन्हीं प्राचीन तरीकों से करते आ रहे हैं।
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है। आज भी अंकशास्त्री नामांक की गणना इसी प्राचीन तरीके से करते हैं।
अपना नामांक जानने के लिये सर्वप्रथम आप अपना नाम अंग्रेजी (English )में लिखें।जैसे यदि किसी व्यक्ति का नाम दिव्या दत्त है तो इस नाम को अंग्रेजी में DIVYA DUTTA लिखें। इसके पश्चात इन अंग्रेजी के नंबरों को लिखें और जमा करें।
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है। नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, इनमें से किसी ने नौ अंक को स्थान दिया तो किसी ने स्थान नहीं दिया। आज भी लगभग सभी अंकशास्त्री नामांक की गणना इन्हीं प्राचीन तरीकों से करते आ रहे हैं। नामांक जीवन में आवश्यक बदलाव ला सकते हैं और हमारे जीवन को आशावादी दिशा प्रदान कर सकते है।
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है। अंकशास्त्री नामांक की गणना इसी तरीके से करते हैं। नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है। नामांक जीवन में आवश्यक बदलाव ला सकते हैं और हमारे जीवन को आशावादी दिशा प्रदान कर सकते है। इनके द्वारा हमें सफलता की दिशा मिलती है।
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है। व्यक्ति के नाम के अक्षरों के कुल योग से बनने वाले अंक को नामांक कहा जाता है। नामांक को
सौभाग्य अंक भी कहते हैं। यह नम्बर परिवर्तनशील हो सकता है। हम ऐसे अनेक लोगों को देख सकते हैं जिन्होंने अपने नाम में बदलाव करके उचित नामांक प्राप्त किया और सफलताओं को प्राप्त किया अत: हम इस नामांक में अनेक बदलाव कर सकते हैं जिस कारण इसे परिवर्तनशील भी कहा गया है।