नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है। नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, इनमें से किसी ने नौ अंक को स्थान दिया तो किसी ने स्थान नहीं दिया। आज भी लगभग सभी अंकशास्त्री नामांक की गणना इन्हीं प्राचीन तरीकों से करते आ रहे हैं। नामांक जीवन में आवश्यक बदलाव ला सकते हैं और हमारे जीवन को आशावादी दिशा प्रदान कर सकते है।